माँ
जब रात को मुझे डर लगे,
तो सीने से लगाती थी तुम माँ...
मै रोती थी तो,
गाना गाकर मुझे मनाती थी तुम माँ ...
तुम कहती थी बेटी पापा तो नही है
लेकिन मै हूँ ना,
और यह कह कर अपने आँसू छुपाती थी तुम माँ..
मेरी आँखों के आँसू अपने आँचल से पोछती,
तो सपनो के झूले मे अक्सर मुझे झुलाती थी तुम माँ..
अब बिन गलती के भी गलत हो जाती हू मै,
मेरी हर गलती को सही कर देती थी तुम माँ..
एक बार फिर सब यादें संजोने का दिल करता है,
एक बार फिर तेरी गोद मे सिर रख के सोने का दिल करता है माँ..
यहाँ रोने वालो को सब कमज़ोर समझते हैं,
यह दुनिया तेरे बिन खाली सी लगती है माँ..
मेरी भूख का एहसास था तुझे माँ,
मेरा तो सुख दुःख सब तेरे पास था माँ..
अब तो समझाने से भी कोई नही समझता,
सब बिन कह समझ जाती थी तुम माँ..
यु तो सारे त्योहार मुझे खाली खाली से लगते है,
एक बार फिर से मेरे पास आजा माँ..
और मुझे खुलकर रोने का दिल कर रहा है ,
एक बार मुझे फिर से गले लगा ले माँ..
पर मत समझना कि तेरी बेटी अकेली है ,
तुम्हारा एहसास तुम्हारा आशीर्वाद मेरे साथ है माँ..
-राहुल

Comments
Post a Comment