भूख से बच्चे मरते हैं…! और कहते हैं — हम चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं! वोट लूट लिए जाते हैं…! और कहते हैं — हमारा संविधान सबसे महान है! बलात्कार रोज़ बढ़ते हैं…! और कहते हैं — हम नारी-प्रधान संस्कृति हैं! छात्र सड़कों पर लाठी खाते हैं…! और कहते हैं — हमारा युवा दुनिया का नंबर वन है! गाँव में जाति की जंजीरें, शहर में धर्म की दीवारें, राज्यों में भाषा की लड़ाइयाँ…! और कहते हैं — हम सेक्युलर हैं! गाय की पूजा होती है…! और वही गाय तस्करी की मंडियों में बिकती है! चौथा स्तंभ बिक चुका है…! सच की जगह झूठ बेचता है, ख़बर की जगह अंधभक्ति फैलाता है…! देश विकसित बनने का ढिंढोरा पीटता है…! पर सड़क, पुल और रेल तक अपने नागरिकों को नहीं दे पाता…! सच दब चुका है… कलम बेची जा चुकी है, और सच्चाई कैद है! सपना नहीं चाहिए .. हक़ चाहिए, अधिकार चाहिए! और मैं… मैं इस देश का आम नागरिक हूँ… पर मेरी आवाज़ आम नहीं है! मैं चुप नहीं रहूँगा! मैं झुकूँगा नहीं! मैं उठूँगा, बोलूँगा, और क्रांति लाऊँगा! - राहुल
अंधेरी रातों मे थपकी देकर सुलाती थी तुम माँ.. जब रात को मुझे डर लगे, तो सीने से लगाती थी तुम माँ... मै रोती थी तो, गाना गाकर मुझे मनाती थी तुम माँ ... तुम कहती थी बेटी पापा तो नही है लेकिन मै हूँ ना, और यह कह कर अपने आँसू छुपाती थी तुम माँ.. मेरी आँखों के आँसू अपने आँचल से पोछती, तो सपनो के झूले मे अक्सर मुझे झुलाती थी तुम माँ.. अब बिन गलती के भी गलत हो जाती हू मै, मेरी हर गलती को सही कर देती थी तुम माँ.. एक बार फिर सब यादें संजोने का दिल करता है, एक बार फिर तेरी गोद मे सिर रख के सोने का दिल करता है माँ.. यहाँ रोने वालो को सब कमज़ोर समझते हैं, यह दुनिया तेरे बिन खाली सी लगती है माँ.. मेरी भूख का एहसास था तुझे माँ, मेरा तो सुख दुःख सब तेरे पास था माँ.. अब तो समझाने से भी कोई नही समझता, सब बिन कह समझ जाती थी तुम माँ.. यु तो सारे त्योहार मुझे खाली खाली से लगते है, एक बार फिर से मेरे पास आजा माँ.. और मुझे खुलकर रोने का दिल कर रहा है , एक बार मुझे फिर से गले लगा ले म...
Comments
Post a Comment