"मेरा देश…!"


भूख से बच्चे मरते हैं…!

और कहते हैं — हम चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं!


वोट लूट लिए जाते हैं…!

और कहते हैं — हमारा संविधान सबसे महान है!


बलात्कार रोज़ बढ़ते हैं…!

और कहते हैं — हम नारी-प्रधान संस्कृति हैं!


छात्र सड़कों पर लाठी खाते हैं…!

और कहते हैं — हमारा युवा दुनिया का नंबर वन है!


गाँव में जाति की जंजीरें,

शहर में धर्म की दीवारें,

राज्यों में भाषा की लड़ाइयाँ…!

और कहते हैं — हम सेक्युलर हैं!


गाय की पूजा होती है…!

और वही गाय तस्करी की मंडियों में बिकती है!


चौथा स्तंभ बिक चुका है…!

सच की जगह झूठ बेचता है,

ख़बर की जगह अंधभक्ति फैलाता है…!


देश विकसित बनने का ढिंढोरा पीटता है…!

पर सड़क, पुल और रेल तक अपने नागरिकों को नहीं दे पाता…!

सच दब चुका है…

कलम बेची जा चुकी है, और सच्चाई कैद है!

सपना नहीं चाहिए .. हक़ चाहिए, अधिकार चाहिए!


और मैं…

मैं इस देश का आम नागरिक हूँ…

पर मेरी आवाज़ आम नहीं है!

मैं चुप नहीं रहूँगा!

मैं झुकूँगा नहीं!

मैं उठूँगा, बोलूँगा, और क्रांति लाऊँगा!


- राहुल

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