तुम्हारी आँखों में
तुम्हारी भूरी आँखों में
कोई साधारण चमक नहीं है..
जैसे पूरी दुनिया
अपना आसमान, अपने तारे,
अपनी धूप…
सब कुछ समेटकर
वहीं ठहर गई हो।
जब भी उन्हें देखता हूँ
ऐसा लगता है
मैं किसी रास्ते पर नहीं,
किसी गहराई में उतर रहा हूँ।
मैं उनमें चलना चाहता हूँ,
भटकना चाहता हूँ,
खो जाना चाहता हूँ..
इतना कि
अपना नाम तक भूल जाऊँ।
तुमने कहा था एक दिन
मेरी आँखें सबसे खूबसूरत हैं।
पर सच तो यह है..
तुम्हारी आँखों में झाँकते ही
मैं इतना खो गया
कि अपना सारा दर्द भूल गया।
मैं डूबता गया…
धीरे-धीरे…
और मुझे बचना भी नहीं था।
उन आँखों में
कुछ अधूरी कहानियाँ हैं,
कुछ अनकहे दर्द,
कुछ छुपे हुए आँसू..
मैं उन सबको
अपना बना लेना चाहता हूँ।
जैसे तुम्हारा हर दुख
मेरे भीतर जन्म ले।
तुम्हारी सुनहरी भूरी आँखें..
उन्हें देखता हूँ तो
कभी चाँद याद आता है,
कभी कोई प्रार्थना,
कभी कोई ईश्वर।
और फिर
एक सच्चाई सामने खड़ी हो जाती है..
उन आँखों में
पहले से कोई बसा है।
उनकी चमक का कारण
कोई और है।
और तब
दिल के किसी कोने से
एक धीमी-सी आवाज़ उठती है....
काश
मैं इन आँखों से
थोड़ा पहले मिला होता…
शायद
मेरा दर्द थोड़ा कम होता,
शायद
तुम्हारी आँखों में
मेरा भी एक घर होता।
पर अब..
मैं बस
उनकी दहलीज़ पर खड़ा हूँ…
एक ख़ामोश इच्छा लेकर,
कि कभी तो
उन गहराइयों में
मेरे नाम की भी
एक जगह बन जाए।
जहाँ मैं
सिर्फ रह सकूँ…
सिर्फ तुम्हारी आँखों में।
- राहुल
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